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अखिलेशवादी विकास विजन विजन के तहत बना आगरा-लखनऊ एक्सप्रेस-वे Agra-Lucknow Expressway built under Akhileshwadi Development Vision Vision

 

अखिलेशवादी विकास का समाजवादी मानक

आगरा-लखनऊ एक्सप्रेस-वे

       आगरा लखनऊ द्रुतगामी मार्ग एक 302 किलोमीटर लम्बा नियंत्रित-पहुंच द्रुतमार्ग या एक्सप्रेसवे है, जो भीड़ग्रस्त सड़कों पर यातायात के साथ साथ ही प्रदूषण और कार्बन पदचिह्नों को भी कम करने के लिए उत्तर प्रदेश एक्सप्रेसवे औद्योगिक विकास प्राधिकरण द्वारा निर्मित किया गया है । यह भारत का सबसे लंबा एक्सप्रेसवे है । इस द्रुतमार्ग ने आगरा और लखनऊ के बीच की दूरी को काफी कम कर दिया है । यह 6-लेन चौड़ा है, और भविष्य में 8-लेन तक विस्तरित किया जा  सकता है । इसका निर्माण प्रदेश की विजनरी सीएम श्री अखिलेश यादव के नेतृत्ववाली समाजवादी सरकार ने करवाया था तथा 21 नवंबर, 2016  को उत्तर प्रदेश के तत्कालीन मुख्यमंत्री, अखिलेश यादव द्वारा इसका उद्घाटन किया गया था।

       द्रुतमार्ग आगरा और लखनऊ को शिकोहाबाद, फिरोजाबाद, मैनपुरी, इटावा, औरैया, कानपुर, उन्नाव, हरदोई इत्यादि नगरों से जोड़ता है । एक्सप्रेसवे आगरा के निकट गांव इतदपुर मद्रा में शुरू होता है, और दस जिलों के 231 गांवों से होते हुए,  लखनऊ के मोहन रोड के पास गांव सरोसा भरोसा में समाप्त होता है । यह द्रुतमार्ग आगरा रिंग रोड के माध्यम से यमुना द्रुतगामी मार्ग से जुड़ा हुआ है और इस प्रकार यह भारत की राजधानी दिल्ली को ग्रेटर नोएडा, एनसीआर और लखनऊ के बीच वाया आगरा एक्सप्रेस-वे लिंक प्रदान करता है । पूरे मार्ग पर 60 मीटर से लंबे 13 पुल तथा इससे छोटे 54 पुल हैं । इसके अतिरिक्त 4 रेलवे ओवर ब्रिज भी बनाए गये हैं ।

द्रुतमार्ग के उद्देश्य निम्नानुसार हैं:

      यात्रा के समय को कम करने के लिए एक तीव्र गति का कॉरिडोर प्रदान करना.

      यमुना के उत्तरी हिस्से पर मुख्य नगरों एवं वाणिज्यिक केंद्रों को जोड़ना.

      राष्ट्रीय राजमार्ग 91 को राहत देना, जो पहले से ही भीड़ग्रस्त है और अलीगढ, एटा और उन्नाव जैसे शहरों के केंद्र से होकर गुजरता है ।

      लखनऊ और आगरा के बीच यात्रा करने वाले वाहनों (वाणिज्यिक और साथ ही ताजमहल आने वाले पर्यटकों के) के प्रदूषण और कार्बन पदचिह्न को कम करना।

      पश्चिमी उत्तर प्रदेश के किसानों के कृषि, बागवानी और दुग्ध उत्पादों को तेजी से बड़े शहरों तक पहुँचाने में सहयोग करना ।

      यमुना नदी में बाढ़ और अन्य आपातकाल के दौरान प्रभावित इलाकों में आपूर्ति की गति को प्रभावित करना ।

      निवेशकों को बड़े पैमाने पर आकर्षित कर राज्य के विकास के लिए एक नई दिशा तैयार करना ।

       द्रुतमार्ग का निर्माण उत्तर प्रदेश एक्सप्रेसवे औद्योगिक विकास प्राधिकरण द्वारा स्वयं अपनी देखरेख में पीपीपी (पब्लिक प्राइवेट पार्टनरशिप) मॉडल पर करवाया था । परियोजना की लागत 15,000 करोड़ रूपये (2.3 बिलियन अमरीकी डॉलर) होने की उम्मीद थी,  लेकिन समाजवादी सरकार के विजनरी संचालक श्री अखिलेश यादव के कुशल नेतृत्व के कारण यह विशाल लक्ष्य मात्र 13,200 करोड़ रूपये (2.1 बिलियन अमेरिकी डॉलर) और केवल 22 महीनों के रिकार्ड समय में ही पूरा किया गया था  । इस एक्सप्रेसवे ने लखनऊ और आगरा के बीच यात्रा का समय 8 घंटे से घटा कर 3.30 घंटे कर दिया है । द्रुतमार्ग की चौड़ाई 6 -लेन है, परन्तु भविष्य में 8 लेन तक विस्तरित होने की इसकी संभावनाओं को ध्यान में रखते हुए इस पर सभी संरचनाएं (प्रमुख पुल, छोटे पुल और अंडरपास) पहले से ही 8-लेन के हिसाब से तैयार की गयी हैं ।

       आगरा-लखनऊ एक्सप्रेसवे का निर्माण 'न्यूनतम दूरी और न्यूनतम कृषि भूमि' फार्मूला पर प्रस्तावित था और इसे उत्तर प्रदेश सरकार द्वारा वित्तपोषित किया गया था, जबकि वर्तमान में केंद्र की सरकार सभी हाईवे को प्राइवेट से बनवा रही है । हालांकि एक्सप्रेसवे पूरी तरह से ईको फ्रेंडली बनाया जाना था, फिर भी 27,582 पेड़ों को निर्माण कार्य की मजबूरी के कारण काटना पड़ा लेकिन इस विशालकाय एक्सप्रेस-वे के बराबर में लाखों पेड़ों को बाद में लगाने का प्रस्ताव पर्यावरण प्रेमी श्री अखिलेश यादव ने भी बनाया था । एक्सप्रेसवे पर सभी सार्वजनिक सुविधाएं हैं जैसे कि अंडरपास, सर्विस सड़कें, ग्रीन बेल्ट, पेट्रोल पम्प, सर्विस सेंटर, रेस्तरां और इन सब के अतिरिक्त एक्सप्रेसवे पर ही दूध, आलू, अनाज, फलों और सब्जियों के लिए चार कृषि मंडियों के बनाने लिए प्रावधान था । जिन्हें भविष्य में प्रति 5 किलोमीटर पर एक मंडी बनाने की महत्वकांक्षी परियोजना विजनरी मुख्यमंत्री श्री अखिलेश यादव की थी । आगरा-लखनऊ एक्सप्रेसवे को ग्रीनफील्ड परियोजना माना जाता है क्योंकि मौजूदा भवनों या बुनियादी ढांचों से काम के समय कोई दिक्कत नहीं हुई थी ।


       लखनऊ एक्सप्रेसवे के लिए जमीन अधिग्रहण का काम 2 सितंबर 2016 से ही शुरू हो गया था । उत्तर प्रदेश एक्सप्रेसवे औद्योगिक विकास प्राधिकरण (यूपीईआईडीएए) ने लगभग 3127 हेक्टेयर जमीन बिना किसी मानव/नागरिक असंतोष के खरीद ली थी, और ग्रामीण इलाकों में जमीन के मालिकों को चार बार और सीआर में शहरी हिस्से में दो बार सीआर का भुगतान करने का फैसला किया गया था । 2015 तक नए भूमि अधिग्रहण कानून के तहत बाकी जमीन का भी अधिग्रहण किया गया था । यहाँ किसी भी किसान ने कोई खास समस्या खड़ी नहीं की थी ।

चरण

दूरी

अनुमानित लागत

निर्माणकर्ता कंपनी

पहला

आगरा से फिरोजाबाद (55 किमी)

1635.75 करोड़ रुपए

पीएनसी इंफ्राटेक लिमिटेड

दूसरा

फिरोजाबाद से इटावा (62 किमी)

1999.49करोड़ रुपए

एफकॉन इन्फ्रास्ट्रक्चर लिमिटेड

तीसरा

इटावा से कन्नौज (57 किमी)

1674.81 करोड़ रुपए

एनएनसी लिमिटेड

चौथा

कन्नौज से उन्नाव (64 किमी)

2124.17करोड़ रुपए

एफकॉन इन्फ्रास्ट्रक्चर लिमिटेड

पांचवाँ

उन्नाव से लखनऊ (63 किमी)

1630 करोड़ रुपए

लॉर्सन और टर्बो लिमिटेड

       आधुनिक विकास पुरुष और समाजवादी सुप्रीमों श्री अखिलेश यादव ने अपनी इस महत्वकांक्षी परियोजना के समक्ष आई सभी समस्याओं का निराकरण प्राथमिकताओं के साथ कराया था-

परियोजना निर्माण कालक्रम-

      नवंबर 2013 : कोई भी डेवलपर इस परियोजना के लिए "बिल्ड, ओन, ऑपरेट और ट्रांसफर" आधार पर बोली लगाने को तैयार नहीं था । डेवलपरों को पुरे एक्सप्रेसवे में मुक्त भूमि पार्सल के प्रावधान को लागु करना इस परियोजना से दूर होने के लिए डेवलपर कंपनियों की मुख्य चिंता थी ।

      जून 2014 : गोयूपी (GoUP) ने डेवलपर कंपनियों के लिए पूरे द्रुतमार्ग में मुक्त भूमि के पार्सल के प्रावधान के बिना, निजी वित्तपोषित आधार की बजाय राज्य सरकार के वित्तपोषण के माध्यम से इस परियोजना को अंजाम देने का फैसला किया । गोयूपी ने 6 लेन के आगरा लखनऊ एक्सप्रेसवे को 5 खण्डों में विभाजित करके बोली लगाई । इसके बाद, 24 कंपनियों ने एक्सप्रेसवे के पांच अलग-अलग खण्डों के लिए आवेदन जमा कर दिए ।

      अगस्त 2014: बोली प्रक्रिया के माध्यम से उन सभी कंपनियों का चुनाव हो चूका था, जो  एक साथ इन पांच वर्गों में से प्रत्येक को क्रियान्वित करेंगे ।

      आगरा-फिरोजाबाद (55.3 किमी, टाटा प्रोजेक्ट्स लिमिटेड),

      फिरोजाबाद-इटावा (62 किमी, अफकोन्स इन्फ्रास्ट्रक्चर लिमिटेड),

      इटावा-कन्नौज (57 किमी, नागार्जुन)

      कानोज-उन्नाव (64 किमी, अफकोन्स इन्फ्रास्ट्रक्चर लिमिटेड),

      उन्नाव-लखनऊ (63 किमी, लार्सन एंड टुब्रो)

      सितंबर 2014: परियोजना के लिए जरूरी भूमि का 50% अधिग्रहित हो चुका था।

      नवंबर 2014 : योजना की नींव रखी गयी। इस 15,000 करोड़ रुपये की परियोजना के लिए 7,000 एकड़ जमीन का अधिग्रहण किया गया था । परियोजना के पूरा होने का लक्ष्य 24 माह निर्धारित किया गया था ।

      मई 2015: यमुना और गंगा नदियों पर दो प्रमुख पुलों पर काम शुरू हुआ । उत्तर प्रदेश के मुख्य सचिव आलोक रंजन ने कहा था कि द्रुतमार्ग अक्टूबर 2016 के अंत तक परिचालन योग्य हो जाएगा । और अंततः इसी डेड लाइन तक निर्माण कार्य विकास पुरुष श्री अखिलेश यादव ने करके दिखा दिया

      फरवरी 2016 : द्रुतमार्ग की कार्य प्रगति गूगल मानचित्र और बिंग मैप्स पर देखी जा सकती थी, कुछ हिस्सों को छोड़कर, कुबेरपुर (आगरा के निकट यमुना एक्सप्रेसवे के अंत में) से लखनऊ तक गूगल मानचित्र पर पूरे खंड देखे जा सकते थे । 

      नवम्बर 2016 : 21 नवंबर 2016 को उत्तर प्रदेश के विजनरी सीएम श्री अखिलेश यादव द्वारा एक्सप्रेसवे का उद्घाटन किया गया था ।

      दिसंबर 2016: द्रुतमार्ग को आंशिक रूप से लखनऊ से शिकोहाबाद तक जनता के लिए खोल दिया गया था । 23 दिसंबर 2016 तक, केवल हल्के वाहनों को ही चलने की अनुमति दी गई थी ।

      फरवरी 2017 : द्रुतमार्ग को लखनऊ से आगरा तक 23 फरवरी 2017 को जनता के लिए खोल दिया गया ।

 

आगरा-लखनऊ प्रवेश नियंत्रित एक्सप्रेसवे परियोजना (ग्रीनफील्ड)

v आगरा-लखनऊ एक्सप्रेसवे की लम्बा- 302.222 किलोमीटर है । यह एक्सप्रेसवे प्रवेश नियंत्रित एवं एलीवेटेड है । एक्सप्रेसवे पर प्रवेश/निकासी हेतु  इण्टरचेंज का निर्माण किया गया ।

v प्रवेश नियंत्रित 06 लेन एक्सप्रेसवे ( 08 लेन में विस्तारणीय) सभी स्ट्रक्चर्स 08 लेन चैड़ाई के निर्मित किये गए ।

v आगरा-लखनऊ प्रवेश नियंत्रित (ग्रीनफील्ड) एक्सप्रेसवे आगरा (आगरा इनर रिंग रोड) से प्रारम्भ होकर जनपद फिरोजाबाद, मैनपुरी, इटावा, औरैया, कन्नौज, हरदोई, कानपुर नगर, उन्नाव होते हुए लखनऊ में मोहान रोड पर ग्राम सरोसा-भरोसा में समाप्त होता है ।

v एक्सप्रेसवे पर कुल 13 दीर्घ सेतु का निर्माण किया गया, जिनमें गंगा नदी पर 750 मी. लम्बाई का तथा यमुना नदी पर 515 मी. लम्बाई का सेतु सम्मिलित है ।

v एक्सप्रेसवे पर लखनऊ एवं आगरा के निकट 02 मुख्य टोल प्लाजा का निर्माण किया गया है । इसके अतिरिक्त इण्टरचेंज पर रैम्प प्लाजा का निर्माण किया गया है ।

v एक्सप्रेसवे पर मुख्य मार्गों की क्रासिंग एवं आवश्यकतानुसार अन्य स्थलों पर कुल 17 इण्टरचेंज का निर्माण एक्सप्रेसवे पर प्रवेश/निकासी हेतु किया गया ।

v एक्सप्रेसवे की पूर्ण लम्बाई में स्थानीय जनता की सुविधा हेतु एक्सप्रेसवे के एक तरफ स्टैगर्ड रूप में सर्विस रोड का निर्माण किया गया। दीर्घ सेतु एवं आर.ओ.बी. के भाग में सर्विस रोड का निर्माण नहीं किया गया ।

v एक्सप्रेसवे पर यात्रियों की सुविधा के लिये लखनऊ से 75 किमी. एवं 198 किमी. की दूरी पर तथा आगरा से 101 किमी. एवं 218 किमी. की दूरी पर कुल 04 वेसाइड एमेनिटीज एरिया विकसित किये गये । प्रत्येक वेसाइड एमेनिटीज एरिया पर खान-पान, पेयजल एवं शौचालय की सुविधा उपलब्ध की गयी थी । इसके अतिरिक्त वाहनों की पार्किंग/मरम्मत एवं यात्रियों के विश्राम हेतु कक्षों एवं डारमेट्री की सुविधा भी उपलब्ध की गयी । प्रत्येक वेसाइड एमेनिटीज पर आई.ओ.सी.एल. एवं रिलायन्स द्वारा 02-02 फ्यूल स्टेशन का संचालन किया जा रहा था ।

v ट्रैफिक की सुरक्षा हेतु यूपीडा द्वारा एक्सप्रेसवे पर 15 इनोवा वाहनों को 24 घण्टे पेट्रोलिंग करने हेतु तैनात किया गया, जिन पर कुल 120 भूतपूर्व सैनिक की तैनाती की गयी थी । इनका दायित्त्व दुर्घटना की स्थिति में घायलों को मदद पहुँचाना तथा सम्बन्धित अधिकारियों को सूचित करना था । इसके अतिरिक्त एक्सप्रेसवे के टोल कलेक्शन एजेन्सी मे. ईगल इन्फ्रा द्वारा भी पेट्रोलिंग हेतु 10 वाहन संचालित किये जा रहे हैं ।

v ट्रैफिक की सुरक्षा हेतु यूपी-112 पुलिस द्वारा पीआरवी वाहन गस्त हेतु लगाये गये ।

v ट्रैफिक को सुगम एवं सुरक्षित रखने की दृष्टि से एक्सप्रेसवे पर एडवांस्ड ट्रैफिक मैनेजमेंट सिस्टम के अन्तर्गत प्रथम चरण में प्रत्येक 4 कि.मी. पर इमरजेंसी कॉल बॉक्स (कुल-152), 50 सी.सी. टी.वी. कैमरा, 10 गति मापक एवं नम्बर प्लेट रिकार्ड करने वाले कैमरे तथा 34 एटीसीसी लगाये गये थे ।

v एक्सप्रेसवे पर दुर्घटना की स्थिति में घायलों को अस्पताल पहुँचाने की सुविधा हेतु 04 एम्बुलेन्स यूपीडा द्वारा लगाये गये । इसके अतिरिक्त एक्सप्रेसवे पर टोल कलेक्शन एजेन्सी मे. ईगल इन्फ्रा द्वारा भी 05 एम्बुलेंस लगाये गये हैं ।

v एक्सप्रेसवे से आवारा पशुओं को हटाने के लिए यूपीडा द्वारा एक एजेन्सी को तैनात किया गया ।

v एक्सप्रेसवे पर वाहनों के गति नियंत्रण हेतु आगरा एवं लखनऊ के समीप स्थित टोल प्लाजा के मध्य वाहनों की औसत गति के आधार पर ओवस्पीडिंग करने वाले वाहनों का चालान किया जा रहा है ।

परियोजना की कुल लागतः रुपए 11526.73 करोड़ (भूमि लागत के अतिरिक्त)

काम प्रारंभ होने की तिथिः फरवरी 2015

समाप्त होने का प्रस्तावित समयः 36 महीना

समाप्त होने का अनुमानित समयः 22-24 महीना

अनुबंध समझौते के अनुसार, परियोजना के निर्माण या समाप्त करने का समय 36 माह था । इस परियोजना का उद्घाटन 21.11.2016 को तत्कालीन मुख्यमंत्री, अखिलेश यादव द्वारा  किया गया था ।

 

परियोजना में प्रस्तावित प्रमुख सुविधाएं थीं :

एक्सेस कंट्रोल्ड एक्सप्रेसवे में सीमित प्रवेश/निकास सुविधाएं ।

कैरेजवे- 06 लेन विभाजित कैरेजवे  (08 लेन तक बढ़ाया जा सकता है)

लखनऊ और आगरा के बीच की दूरी का समय लगभग 3.5 घंटे तक घट जाने की संभावनाएं ।

प्रमुख सड़क हेतु इंटरचेंज, पदयात्रियों और जानवरों के लिए अंडर पास की सुविधा।

एक्सप्रेसवे के दोनों किनारों पर सर्विस रोड का प्राविधान और एक्सप्रेसवे पर बड़े पुल, रेल ओवर ब्रिज और शॉपिंग आर्केड की सुविधा ।

एक्सप्रेसवे के दोनों ओर चार जगहों पर प्रसाधन, पेट्रोल पंप, सर्विस स्टेशन, रेस्टोरेंट और शॉपिंग आर्केड के साथ-साथ अन्य सुविधाएं प्रदान करना ।

एक्सप्रेसवे को इस प्रकार बनाया गया है कि यह एयरस्ट्रिप का प्रावधान है जिससे आपातकालीन परिस्तिथियों में यहां फाईटर प्लेन की लैंडिंग और टेक ऑफ कराया जा सके ।

अग्रिम टैरिफ प्रबंध प्रणाली जिसमें इलेक्ट्रॉनिक कॉल बॉक्स (ईसीबी), डिजिटल मैसेज स्क्रीन, वीडियो मॉनिटरिंग एण्ड इंसिडेंट डिटेक्शन प्रणाली, जीपीएस आधारित एंबुलेंस सेवा आदि शामिल थीं ।

रोशनी प्रायोजन हेतु ग्रीन ऊर्जा (सोलर) का इस्तेमाल ।

एक्सप्रेसवे के दोनों ओर ग्रीन बेल्ट की स्थापना और बारिश के पानी हेतु संचयन की सुविधा ।

दो जगहों पर मंडी की स्थापना (कन्नौज और मैनपुरी), जहां से एक्सप्रेसवे तक पहुंचा जा सके ।

 लखनऊ-आगरा एक्सप्रेस-वे में चार रेल ओवरब्रिज, 13 बड़े पुल, 52 छोटे पुल, 59 अंडरपास और 132 पैदल यात्री पथ बने । इसके बन जाने से समय और ईंधन दोनों की बचत हो रही है । शहरों के लघु उद्योग, दस्तकारी और कृषि उत्पादों का रास्ता खुला है । आगरा का चमड़ा उद्योग, फिरोजाबाद का कांच उद्योग और कन्नौज का इत्र उद्योग को भी लखनऊ-आगरा एक्सप्रेस-वे के बनने से फायदा हुआ है.

इसे बनाने के लिए सरकार ने भूमि अधिग्रहण कानून के तहत धारा-4 की अधिसूचना जारी की थी । यह अधिसूचना 19 अक्टूबर 2013 को जारी हुई थी । बाद में एक्सप्रेस-वे के लिए भूमि अधिग्रहण की धारा-6 की अधिसूचना भी 30 अक्टूबर 2014 को प्रकाशित कर दी गई । याची फिरोजाबाद के एक दर्जन से अधिक किसानों का कहना था कि बिना उनके आपत्तियों का निस्तारण किए सरकार लखनऊ-आगरा एक्सप्रेस-वे का निर्माण करा रही है ।

       न्यायमूर्ति कृष्ण मुरारी और न्यायमूर्ति प्रमोद कुमार श्रीवास्तव ने शिकोहाबाद, जिला फिरोजाबाद के गांव असलेमपुर नगला कान्हार और उरावर हस्तरफ के कुछ किसानों की एक्सप्रेस-वे के खिलाफ याचिकाओं को खारिज कर दिया । न्यायालय ने एक्सप्रेस-वे के खिलाफ किसानों की याचिकाओं को खारिज करते हुए कहा था कि एक्सप्रेस-वे बनना जनहित में है । इस कारण अधिग्रहण की प्रक्रिया से जमीनों को मुक्त रखना उचित नहीं होगा ।

       तत्कालीन सपा सुप्रीमो नेता जी मुलायम सिंह यादव ने ड्रीम प्रोजेक्ट आगरा-लखनऊ एक्सप्रेस वे का शिलान्यास करते समय अधिकारियों के सामने एक शर्त रख दी थी । उन्होंने सीएम और वहां मौजूद मंत्रियों तथा अधिकारीयों से कहा कि आप शिलान्यास के साथ इसके उद्घाटन की तिथि भी तय करिए । इसके बाद अधिकारियों से आश्वासन लिया कि वे 22 महीने में काम खत्म करेंगे । फिर मुलायम सिंह ने वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए पांच जगहों पर प्रोजेक्ट का एक साथ शिलान्यास किया था ।

         पब्लिक-प्राइवेट पार्टनरशिप के जरिए एक्सप्रेस वे बनाने के लिए हुई बिडिंग में किसी भी निवेशक के रुचि नहीं दिखाई थी । इसके बाद सरकार ने ईपीसी मॉडल पर एक्सप्रेस वे के निर्माण का फैसला लिया था । किसानों से भूमि अधिग्रहण और निर्माण कार्य शुरू करने के लिए अखिलेश सरकार द्वारा बजट में अनुपूरक प्रस्तावों में 450 करोड़ रुपए की व्यवस्था की गई थी ।

300 किमी : दुनिया की सबसे लम्बी सर्विस लेन

       आगरा, फिरोजाबाद, शिकोहाबाद, मैनपुरी, इटावा, कन्नौज, हरदोई और लखनऊ के मलीहाबाद से होकर गुजरने वाली आगरा-लखनऊ एक्सप्रेस-वे के दोनों तरफ झील और हरी पट्टी भी बनाए जाने का प्रस्ताव था ।  साथ ही दोनों तरफ सर्विस लेन तीन सौ किलोमीटर करने का प्रस्ताव भी पारित किया गया था ।

        लखनऊ-आगरा एक्सप्रेस-वे निर्माण के अंतर्गत 'प्री कास्ट गर्डर' टेक्नॉलजी अपनाई गयी थी, जिससे समय की बचत हो सके, लखनऊ-आगरा एक्सप्रेस-वे को 22 महीने में तैयार करने के लिए खास 'प्री कास्ट गर्डर' टेक्नॉलजी का इस्तेमाल किया गया था । इसके लिए गंगा और यमुना नदी पर बनने वाले पुल पर फोर लेन के प्री-कास्ट बॉक्स गर्डर लगाए गए । पुराने तरीके में गर्डर साइट पर ही ढाले जाते थे। 'प्री कास्ट गर्डर' टेक्नॉलजी के तहत यार्ड में गर्डर बनाकर यहां ट्रकों से लाए गए । इन्हें सीधे नदी पर बने पिलर्स पर लगा दिया गया ।  22 महीने में काम पूरा करने के लिए स्टील गर्डर भी लाये गए ,जिन्हें तुरंत लगाया जा सका । आरओबी और दूसरे बड़े पुलों में भी गर्डर लगाकर काम किया गया ।

 

 

लखनऊ-आगरा एक्सप्रेस-वे निर्माण के अंतर्गत बने पुल-

v 13 पुल 60 मीटर से लंबे ।

v इससे छोटे 54 पुल

v 4 रेलवे ओवर ब्रिज बनाए गए ।

v 603 छोटे पुल भी बनाये गए ।

 

       लखनऊ-आगरा एक्सप्रेस-वे का निर्माण उत्तर प्रदेश की अखिलेश यादव सरकार द्वारा स्वयं अपनी देखरेख करवाया गया था । 308 कि.मी. लंबे इस एक्सप्रेस वे को यूपी एक्सप्रेस डेवलपमेंट अथारिटी ईपीसी  (EPC) माडल पर बनाया गया था ।

       यह एक्सप्रेस-वे यमुना एक्सप्रेस-वे से अधिक आधुनिक है और यह कोहरे और गति को स्वत: नियंत्रित करने वाला बेमिसाल हाई-वे है । इस रिंग रोड में कोहरे का असर तो नहीं ही पड़ेगा, साथ में इसे यूं बनवाया गया है कि किसी भी हालत में रात के वक्त विपरीत दिशा से आ रहे वाहन की हेड लाइट की रोशनी चालक पर नहीं पड़ेगी । इससे कोहरे से बचाव तो होता ही है, साथ में रात के समय एक्सीडेंट की आशंका न्यूनतम हो जाती है । असल खतरा सड़क के किनारे खड़े डंपर या ट्रक होते हैं और यूपी की एक्सप्रेस अथारिटी ने किया यह है कि अगर कोई ट्रक या डंपर सड़क किनारे खड़ा पाया गया तो उस पर जुर्माना तो लगेगा ही, साथ में उसका लाइसेंस रद्द किया जा सकता है । आगरा-लखनऊ एक्सप्रेस वे बनने से दिल्ली से लखनऊ तक की जो यात्रा अभी दस घंटे में पूरी होती थी, वह महज पांच घंटे में पूरी हो जाती है । जाड़े में कोहरा सारे परिवहन को चौपट कर देता है । पूरा उत्तर भारत कोहरे की चपेट में रहता है और इस वजह से न केवल सड़क मार्ग बल्कि रेलमार्ग और हवाई सेवाएं भी अवरुद्ध रहती हैं । अब तक किसी भी सरकार ने कोहरे से निजात पाने के कोई कारगर उपाय नहीं किए थे । अगर सड़क के बीच रेडियम पट्टी लगाकर भी कोहरे से निपटा जा सकता है तो यह उपाय भी करना चाहिए, भले ही खर्चीला हो क्योंकि सुरक्षा ज्यादा जरूरी है । लखनऊ में रिंग रोड पर इसका ख्याल रखा गया था, तो अन्य उत्तरी राज्यों को भी चाहिए कि इस पट्टी का प्रयोग करें। दूसरे डिवाइडर पर घनी झाडि़यां लगाकर तमाम सड़क दुर्घटनाएं टाली जा सकती हैं। इसी तरह सड़क पर बाड़ बहुत जरूरी है। आगरा-लखनऊ हाईवे इस मायने में एक नजीर बन गया है । सड़क परिवहन को स्मूथ बनाना एक चुनौती है, क्योंकि सड़क मार्ग अब देर सवेर एक अपरिहार्य जरूरत बन जाएगा । इसी दृष्टिकोण के साथ आधुनिक विकास के पर्याय बन चुके श्री अखिलेश यादव ने लखनऊ-आगरा एक्सप्रेस-वे निर्माण काम कराया था ।

 

 

 

महत्वकांक्षी आगरा-लखनऊ एक्सप्रेस- वे परियोजना को केवल का 22 महीने में निर्माण करके दिखाया-

     110 मीटर चौड़ा एक्सप्रेस-वे आगरा, फिरोजाबाद, मैनपुरी, इटावा, औरैया, कन्नौज, कानपुर शहर, उन्नाव, हरदोई और लखनऊ से होकर गुजरेगा । समाजवादी पार्टी (सपा) प्रमुख श्री मुलायम सिंह यादव ने कहा था कि यह परियोजना राज्य में विकास और समृद्धि की एक नई लहर लाएगी ।

भारतीय वायु सेना के छह लड़ाकू विमान उत्तर प्रदेश में भारत के सबसे लंबे समय तक एक्सप्रेसवे के प्रभावशाली उद्घाटन के अवसर पर स्टार आकर्षण थे । 10 जिलों, 236 गांवों और 3,500 हेक्टेयर भूमि के चलते एक्सप्रेसवे आगरा और लखनऊ को शिकोहाबाद, फिरोजाबाद, मैनपुरी, इटावा, औरैया, कन्नौज, कानपुर नगर, उन्नाव और हरदोई से जोड़ता है । एक्सप्रेसवे चार राष्ट्रीय राजमार्गों, दो राज्य महामार्गों और पांच नदियों (गंगा, यमुना, इस्न, साईं और कल्याणी) के माध्यम से गुजरता है । एक्सप्रेसवे आगरा के पास स्थित एटमाडपुर मद्रास गांव में शुरू होता है और लखनऊ के मोहन रोड के निकट सरोजा- भोरोसा गांव में समाप्त होता है । आगरा-लखनऊ एक्सप्रेसवे आगरा रिंग रोड के जरिए प्रसिद्ध यमुना एक्सप्रेसवे से जुड़ा है । इससे दिल्ली-लखनऊ  में अच्छी कनेक्टिविटी बनी है । एक्सप्रेसवे को सहज यात्रा के माध्यम से एक समस्त विकास सुनिश्चित करने, वाहनों के कार्बन पदचिह्न को कम करने और बड़े शहरों में किसानों को अपने उत्पादों की पहुंच का विस्तार करने में मदद हुई। एक हरे रंग का बेल्ट भी एक्सप्रेसवे पर विकसित किया गया था  जिससे कि दोनों तरफ पेड़ लगाकर और औसत दर्जे के पौधों को लगाया जा सके ।

 

 

समाजवादी सरकार 15 लाख रूपया से कम कीमत की गाड़ी पर कोई टोल नहीं लगाना चाहती थी!

      समाजवादी सरकार 15 लाख रूपया से कम कीमत की गाड़ी पर कोई टोल नहीं लगाना चाहती थी. उत्तर प्रदेश की वर्तमान बीजेपी सरकार ने 302 किलोमीटर लंबी एक्सप्रेसवे का इस्तेमाल करने वाले वाहनों के लिए टोल दरें तय की हैं, टोल वाहन से वाहन तक अलग-अलग होंगे और दोनों पक्षों से चलने वाले वाहनों पर लागू होगा,  "कारों, जीप, वैन या हल्के मोटर वाहनों के लिए रुपये 570 रुपए, हल्के वाणिज्यिक वाहन या मिनी बस के लिए रुपये 905, बस और ट्रक के लिए 1,815 रूपये, भारी निर्माण कार्य मशीन और बहु-धुरा वाहन के लिए 2,785 रु। 3 से 6) और अधिक आकार के वाहन (7 और ऊपर धुरों) के लिए रुपये 3,575  

       भारतीय वायुसेना ने मिराज, सुखोई 30, एमआईजी और सी -130 जे सुपर हरक्यूलिस के चार इंजन टर्बोप्रॉप सैन्य परिवहन विमान सहित लैंडिंग और अपने लड़ाकू विमानों को ले जाने से पहले दो बार हवाई पट्टी का परीक्षण किया था । यात्रियों की सुरक्षा के लिए, यूपीईआईडीए ने एक्सप्रेसवे पर नौ पुलिस स्टेशन स्थापित करने का फैसला किया गया था, यह यात्रियों को सुरक्षित और सुरक्षित मार्ग प्रदान करने के लिए मार्ग पर 'डायल 100' पुलिस इंटरसेप्टर और एम्बुलेंस भी लगाए गए हैं । एक सद्भावना संकेत के रूप में, यूपीईआईडीए रात में यात्रा करने वाले ट्रकों और बसों के ड्राइवरों के लिए एक कप चाय की पेशकश करेगा ।

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